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نوع شعر |
شماره بیت |
شماره شعر |
متن کامل |
ابیاتی از شعر |
شماره نتیجه |
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غزل
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1
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1
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[ شرح ] |
الا یا ایها الساقی ادر کأسا وناولهاکه عشق آسان نمود اول ولی افتاد مشکلها
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1 |
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غزل
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2
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1
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[ شرح ] |
به بوی نافه ای کآخر صبا زان طره بگشایدزتاب جعد مشکینش چه خون افتاد در دلها
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غزل
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3
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1
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[ شرح ] |
مرا در منزل جانان چه امن عیش چون هردمجرس فریاد می دارد که بربندید محملها
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3 |
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غزل
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4
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1
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[ شرح ] |
به می سجاده رنگین کن گرت پیر مغان گویدکه سالک بی خبر نبود ز راه و رسم منزلها
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4 |
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غزل
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5
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1
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[ شرح ] |
شب تاریک و بیم موج وگردابی چنین هایلکجا دانند حال ما سبکباران ساحلها
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5 |
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غزل
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6
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1
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[ شرح ] |
همه کارم ز خود کامی به بد نامی کشید آخرنهان کی ماند آن رازی کزو سازند محفلها
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6 |
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غزل
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7
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1
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[ شرح ] |
حضوری گر همی خواهی ازو غایب مشو حافظمتی ما تلق من تهوی دع الدنیا و اهملها
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7 |
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غزل
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1
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2
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[ شرح ] |
صلاح کار کجا و من خراب کجاببین تفاوت ره کز کجاست تا بکجا
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8 |
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غزل
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2
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2
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[ شرح ] |
دلم ز صومعه بگرفت و خرقه سالوسکجاست دیر مغان و شراب ناب کجا
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9 |
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غزل
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3
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2
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[ شرح ] |
چه نسبتست به رندی صلاح و تقوی راسماع وعظ کجا نغمه رباب کجا
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10 |
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غزل
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4
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2
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[ شرح ] |
ز روی دوست دل دشمنان چه دریابدچراغ مرده کجا شمع آفتاب کجا
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11 |
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غزل
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5
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2
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[ شرح ] |
چو کحل بینش ما خاک آستان شماستکجا رویم بفرما ازین جناب کجا
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12 |
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غزل
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6
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2
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[ شرح ] |
مبین به سیب زنخدان که چاه در راهستکجا همی روی ای دل بدین شتاب کجا
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13 |
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غزل
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7
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2
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[ شرح ] |
بشد که یاد خوشش باد روزگار وصالخود آن کرشمه کجا رفت و آن عتاب کجا
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14 |
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غزل
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8
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2
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[ شرح ] |
قرار و خواب ز حافظ طمع مدار ای دوستقرار چیست صبوری کدام و خواب کجا
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15 |
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غزل
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1
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3
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[ شرح ] |
اگر آن ترک شیرازی به دست آرد دل ما رابه خال هندویش بخشم سمرقند و بخارا را
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16 |
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غزل
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2
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3
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[ شرح ] |
بده ساقی می باقی که در جنت نخواهی یافتکنار آب رکناباد و گلگشت مصلا را
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17 |
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غزل
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3
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3
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[ شرح ] |
فغان کاین لولیان شوخ شیرین کار شهرآشوبچنان بردند صبر از دل که ترکان خوان یغما را
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18 |
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غزل
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4
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3
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[ شرح ] |
ز عشق نا تمام ما جمال یار مستغنیستبه آب و رنگ و خال و خط چه حاجت روی زیبا را
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19 |
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غزل
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5
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3
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[ شرح ] |
من از آن حسن روز افزون که یوسف داشت دانستمکه عشق از پرده عصمت برون آرد زلیخا را
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20 |
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غزل
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6
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3
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[ شرح ] |
اگر دشنام فرمایی وگر نفرین دعا گویمجواب تلخ می زیبد لب لعل شکر خا را
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21 |
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غزل
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7
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3
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[ شرح ] |
نصیحت گوش کن جانا که از جان دوستر دارندجوانان سعادتمند پند پیر دانا را
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22 |
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غزل
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8
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3
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[ شرح ] |
حدیث از مطرب و می گو و راز دهر کمتر جوکه کس نگشود ونگشاید به حکمت این معما را
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23 |
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غزل
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9
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3
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[ شرح ] |
غزل گفتی و در سفتی بیا و خوش بخوان حافظکه بر نظم تو افشاند فلک عقد ثریا را
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24 |
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غزل
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1
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4
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[ شرح ] |
به ملازمان سلطان که رساند این دعا راکه به شکر پادشاهی ز نظر مران گدا را
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25 |
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غزل
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2
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4
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[ شرح ] |
ز رقیب دیو سیرت به خدای خود بنالممگر آن شهاب ثاقب مددی دهد خدا را
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26 |
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غزل
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3
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4
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[ شرح ] |
مژه سیاهت ار کرد به خون ما اشارتزفریب او بیندیش و غلط مکن نگارا
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27 |
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غزل
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4
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4
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[ شرح ] |
دل عالمی بسوزی چو عذار بر فروزیتو ازین چه سود داری که نمی کنی مدارا
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28 |
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غزل
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5
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4
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[ شرح ] |
همه شب در این امیدم که نسیم صبحگاهیبه پیام آشنایان بنوازد آشنا را
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29 |
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غزل
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6
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4
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[ شرح ] |
چه قیامتست جانا که به عاشقان نمودیدل و جان فدای رویت بنما عذار ما را
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30 |
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غزل
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7
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4
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[ شرح ] |
بخدا که جرعه ای ده تو به حافظ سحر خیزکه دعای صبحگاهی اثری کند شما را
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غزل
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1
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5
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[ شرح ] |
دل می رود ز دستم صاحبدلان خدا رادردا که راز پنهان خواهد شد آشکارا
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غزل
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2
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5
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[ شرح ] |
کشتی شکستگانیم ای باد شرطه برخیزباشد که باز بینم دیدار آشنارا
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غزل
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3
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5
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[ شرح ] |
ده روزه مهر گردون افسانه است و افسوننیکی به جای یاران فرصت شمار یارا
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غزل
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4
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5
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[ شرح ] |
در حلقه گل و مل خوش خواند دوش بلبلهات الصبوح هبوا یا ایها السکارا
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35 |
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غزل
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5
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5
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[ شرح ] |
ای صاحب کرامت شکرانه سلامتروزی تفقدی کن درویش بینوا را
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36 |
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غزل
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6
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5
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[ شرح ] |
آسایش دو گیتی تفسیر این دو حرفستبا دوستان مروت با دشمنان مدارا
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37 |
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غزل
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7
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5
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[ شرح ] |
در کوی نیکنامی ما را گذر ندادندگر تو نمی پسندی تغییر کن قضا را
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غزل
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8
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5
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[ شرح ] |
آن تلخوش که صوفی ام الخبائثش خوانداشهی لنا و احلی من قبله العذارا
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غزل
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9
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5
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[ شرح ] |
هنگام تنگدستی در عیش کوش ومستیکاین کیمیای هستی قارون کند گدا را
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40 |
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غزل
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10
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5
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[ شرح ] |
سرکش مشو که چون شمع از غیرتت بسوزددلبر که در کف او مومست سنگ خارا
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41 |
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غزل
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11
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5
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[ شرح ] |
آیینه سکندر جام میست بنگرتا بر تو عرضه دارم احوال ملک دارا
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غزل
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12
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5
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[ شرح ] |
خوبان پارسی گو بخشندگان عمرندساقی بده بشارت رندان پارسا را
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غزل
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13
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5
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[ شرح ] |
حافظ بخود نپوشید این خرقه می آلودای شیخ پاکدامن معذور دار ما را
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44 |
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غزل
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1
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6
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[ شرح ] |
صبا به لطف بگو آن غزال رعنا راکه سر به کوه و بیابان تو داده ای ما را
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غزل
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2
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6
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[ شرح ] |
شکر فروش که عمرش دراز باد چراتفقدی نکند طوطی شکرخا را
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غزل
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3
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6
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[ شرح ] |
غرور حسنت اجازت مگر نداد ای گلکه پرسشی نکنی عندلیب شیدا را
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غزل
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4
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6
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[ شرح ] |
به خلق و لطف توان کرد صید اهل نظربه بند و دام نگیرند مرغ دانا را
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غزل
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5
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6
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[ شرح ] |
ندانم از چه سبب رنگ آشنایی نیستسهی قدان سیه چشم ماه سیما را
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غزل
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6
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6
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[ شرح ] |
چو با حبیب نشینی و باده پیماییبه یاد دار محبان باد پیما را
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50 |
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